परीक्षा में सफलता के लिए मंत्र और उपाएँ
फिलहाल अभी कुछ दिनों के बाद ही हमारे देश में बच्चों की परिक्षाएँ शुरू हो जाएंगी और जब- जब परीक्षाएं आती है तब- तब बच्चों के परिवार वाले उनके माता- पिता अपने बच्चों से काफी उम्मीद करते हैं की हमारा बच्चा अच्छे नंबरों -अंको से पास होगा ।इसमें वो परिवार ज्यादा उम्मीद -रोमांच रखते है जिनके बच्चें बोर्ड के एग्जाम दे रहे क्यूंकि वे अपने बच्चे की आगे की पढाई को लेकर चिंतित रहते है |
जिन बच्चों के बोर्ड के पेपर चल रहे है उनसे और उनके परिवार वालो से निवेदन है की उन बच्चों का मोटिवेशन, उत्साह बढ़ाएं,घर का वातावरण ऐसा बनाए जिससे बच्चों का पढाई में मन लगे और उन्हे निचे दिए गए कुछ मन्त्र और उपाय है कृपया इन्हे अपनाएं:-
( (1) माँ सरस्वती :-
माँ सरस्वती को विद्या की देवी कहा गया है, वे त्रि देवियों में से एक है और त्रि देवों में सृष्टि के रचेयता भगवान् श्री बह्रमा जी की पत्नी भी है ,उनके कुछ मंत्र और क्रियाएं है जो बच्चों को नित्य स्मरण करनी चाहिए ।जैसे :-
या देवी सर्वभूतेषु बुद्धि रूपेण संस्थिता |
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ||
इस मंत्र का उच्चारण प्रातः नहा -धोकर देवी सरस्वती का यन्त्र या तस्वीर पर सफ़ेद रंग के फूल-चावल चढ़ायें ।सरस्वती मंत्र का जाप सरस्वती माला को फेरते हुए करे जो है :-
ॐ ऐं सरस्वत्यै ऐ नमः
इस मंत्र का कम से कम सात बार जाप करें और इसके साथ सरस्वती का गायित्री मंत्र का भी जाप करें :-
ॐ सरस्वत्यै विधमहे ,ब्रह्मपुत्रियै धीमहि ।
तन्नो देवी प्रचोदयात ।।
माँ सरस्वती के और भी रूपों में उच्चारण करना लाभप्रद साबित होता है जैसे :-
ॐ सरस्वती गया दृष्ट्वा ,विणा पुस्तक धरणीये।
हंस वाहिनी समायुक्ता माँ विद्या दान करितु में ॐ।।
( (2 ) भगवान् श्री कृष्ण के मंत्र एवं उपाय :-
योगेश्वर श्री कृष्ण प्रसन्न भवः ।
ये श्री कृष्ण मंत्र का जाप रुद्राक्ष माला को फेरते हुए 108 बार करे।इसके बाद इस मंत्र को सफ़ेद कागज पर श्री कृष्ण का ध्यान करते हुए 31 बार लाल पेन से लाल स्याही से लिखे और इस कागज को इम्तेहान देते समय जेब में रखे और इम्तेहान होने के बाद इस कागज को पूजा घर में रखें ।
(3) भगवान् श्री राम के मंत्र एवं उपाय :-
प्रातः
स्नान करके घर में या श्री राम जी के मंदिर में उनकी मूर्ति या चित्र के सामने बैठ कर जाप करें |
जेहि पर कृपा करहिं जान जानि।
कवि उर अजिर
नचावहिं वानि। ।
मोरि सुधारहि सो सब भांति ।
जासु कृपा नहि कृपा अघाति।।
इस मंत्र का 108 बार जप करें, इस मंत्र का अर्थ है :-हे प्रभु जिस पर भी आप कृपा करें उस अज्ञानी में भी कवि के विचार जागने लगते है ,प्रभु मै भी अज्ञानी हूँ, और मुझ पर भी कृपा करें और सुधार करें ।
भगवान् श्री राम के स्मरण करने मात्र से ही सभी कष्ट दूर हो जाते है और पढाई में सफलता और आत्मविश्वाश बढ़ता है , ' रामचरित्रमानस ' के अनुसार इस मंत्र का जाप करें :
गुरु गृह गए पढ़न रघुराई ।
अल्पकाल विद्या लब आई ।।
इस चोपाई का उच्चारण 108 बार करें और चोपाई का अर्थ है:- हे प्रभु राम मै शिक्षा ग्रहण करने जा रहा हूँ मुझे
जल्दी ज्ञान प्राप्त हो ।
(4) भगवान हनुमान जी के उपाए और मंत्र
:-
जिन विद्यार्थियो के परीक्षा
के दिन निकट है वे सुबह स्नान करके हनुमान मंदिर मेँ या घर मेँ हनुमान चित्र के सामने
हनुमान जयंती या मंगलवार, शनिवार को हनुमान चालीसा का पाठ शांत और एकाग्रित मुद्रा
मेँ नित्य प्रतिदिन करें ,हनुमान चालीसा मेँ एक दोहा है :-
बल बुद्धि विद्या देहु
मोरि, हरहु क्लेश बिकार ।।
इसका अर्थ है :- हे भगवान् हनुमान
मै अज्ञानी हूं मुझे ज्ञान ,विद्या ,बल दे , और मेरे कष्ट हरें। हनुमान चालीसा का पाठ
प्रतिदिन 108 बार करें ,भगवान हनुमान जी की कृपा होगी ।
(5 ) भगवान श्री गणेश जी का उपाए :-
हर बुधवार को गणेश मंदिर में या घर पर ही गणेश चित्र के सामने नियमित रूप से पूजा करें और मुंग की दाल के लड्डू का भोग लगा कर परीक्षा में सफल होने की कामना करें ।
(6 ) श्री शनि देव जी के उपाए :-
यदि परिवार वालो को लगे की बच्चे का मन पढाई मेँ नही तू उसे ज्योतिषयों ,पण्डितों से उपाएं कराना चाहिए क्यूंकि ऐसा जब शनि की साढ़ेसाती और ढैया चलती है तब भी ऐसा होता है इसमें सरसों के तेल का छांया दान या शनि की वस्तुओं का दान कर सकते है ।
हम कुछ छोटे -छोटे उपाएं भी घर पर ही कर सकते है जैसे:- अपने स्टडी रूम मेँ किताबों को खोला न छोड़े ,उन्हें ठीक से रखें जहां पढाई करें वहाँ अन्न ग्रहण न करें घर मेँ माँ सरस्वती की तस्वीर ,विणा या फिर स्वामी विवेकानंद की तस्वीर भी रख सकते है , और परीक्षा वाले दिन घर मेँ शांति का माहौल बनाएं बच्चो के good luck के लिए उनकी आरती ,अभिषेक और मीठी दही ख़िलाके परीक्षा के लिए भेजे ।
अंत मेँ हम यही कहना चाहेंगे की हमे अपने बच्चों का उत्साह बढ़ाना चाहिए ,घर का वातावरण ऐसा बनाना चाहिए की बच्चे का मन पढाई मेँ लगें, उसे विसंगतियों से दूर रखेँ ।
ईश्वर के समक्ष केवल प्रार्थना ही ना करे,
बल्कि..................
ध्यान भी लगाए। प्रार्थना में हम ईश्वर से बात करते हैं
जबकि...................
ध्यान में ईश्वर हमसे बात करते हैं।
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